#gareeb Kavita shayari

लोग ख़ुदा से, सुख चैन आराम माँगते है ।
एक बाल्कनी वाला, मकान माँगते है।।
मेरे नशीब में तो, एक रोटी नही,
रोटी खुदा से, ये मुक़ाम माँगते हैं ।।


भूख क्या होती है, एक गरीब जनता है ।
तभी तो रोटी की, रहम माँगता है ।।
रोटी का टुकड़ा कुत्ते को भी देता है,
क्योंकि ओ इंसानियत का नाम जनता है ।।


चला जाता हूँ, किसी भी राह में ।
बिना रुके, न किसी के चाह में ।।
आशिर्वाद हो ख़ुदा का।
तो रोटी मिल जाती राह में ।।


हर एक दिन, मेरे लिए नई चुनौती है ।
सब देखते हमे, as a  पनौती है ।।
क्या करे हम उनके सोच का,
क्योकि उन्हें समझना भी चुनौती ।।


हमसे पूछो ये दुनियां कितनी अजीब है ।
घर मे पड़ी दुनिया भर की चीज़ है ।।
फिर भी कोच रहे अपने नशीब है ।
हमसे भी ज्यादा तो ये गरीब है ।।






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